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हमारे नाम / असंगघोष

मुझे
एक नाम से पुकारता है
कोई रोज,
वो नहीं जानता
कि मैं कौन हूँ
उसे पता
केवल मेरा नाम
मतलब!
मुझे पुकारने का
एक माध्यम
एक नाम।

हिन्दी और अंग्रेजी में
मेरी छाती पर
टंगे बैज में भी लिखा है
एक नाम
जो बिलकुल वैसा ही है
तुम्हारे अलावा
जैसा सब पुकारते हैं
मुझे उसी तरह
जैसे पुकारता है
मेरा पिता
और मैं झट से
उस ओर देखता हूँ
जहाँ से आती है
मुझे पुकारने की आवाज।

खुशी होती है
कोई जब मेरे नाम से
मुझे पुकारता है।

मेरे घर के बाहर भी लिखा है
मेरा नाम
वैसा ही जैसा
मेरी अंकसूची में लिखा है
बावजूद इन सबके
केवल तुम ही पुकारते रहे हो मुझे
मेरे जातिसूचक शब्द से
मुझे अपमानित करने
तुम बिगाड़ते रहे हो मेरा नाम
ताकि लोगों में दबदबा बना रहे तुम्हारा
और कोई विरोध ना करे
यह चाहते रहे हो हमेशा तुम
इसलिए हमारे नाम
दिनों के नामों पर रखे गए
एतरा, सोमला, मंगला, बुध्या, वगैरह-वगैरह
ताकि तुम और विकृत कर सको
हमारा नाम
जैसे करते रहे हो
सिलिया, हरखू, बुधिया, घीसू, मुलिया,
गंगी, सुखिया और दुखी चमार
आदि इत्यादि
अपनी कथा कहानियों में।

मैंने भी तुम्हारी ही तरह
अपने पात्रों का नाम रखना सीख लिया है।