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अँग उघारल झिलि झाड़ल / अंगिका लोकगीत

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

अँग उघारल[1] झिलि[2]झाड़ल[3], हिरदै[4] बीच लागल कसाय[5]
ते तोरा पोछल आछल[6] रे दुलरुआ, के तोरा कूटल कसाय॥1॥
बहिनी हमर पोछल आछल, अम्माँ कूटल कसाय॥2॥
एक कोस गेल बाबू दुइ कोस गेल, तेसरहिं मन पछताय।
घुरि घर[7] जैतहुँ[8] अम्माँ गोड़[9] लागतहुँ, अम्माँ सेॅ लितहुँ[10] असीख[11]॥3॥
अम्माँ मोरा आसीख देलखिन[12], जैतहिं[13], जैतहिं[14] होयत[15] बिआह।
सोने मौरी होयत बिआह।
भेल बिआह राम चलु कोहबर, सीता लेल अँगुरी लगाय॥4॥

शब्दार्थ
  1. उघारा; उघाड़ना
  2. उबटन लगाने पर शरीर से छूटने वाला मैल
  3. झाड़ा
  4. हृदय
  5. अंगराग लगाना
  6. पोंछा-आछा; ठीक से साफ किया
  7. लौटकर
  8. जाता
  9. प्रणा करता
  10. लेता
  11. आशीर्वाद
  12. दिया
  13. जाते ही
  14. जाते ही
  15. होगा