भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

अंकुरण / रंजना जायसवाल

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

हमारे सपने
टूटे नहीं थे
फूटकर बिखर गए थे
सोचा सबने –
मिट गए
पर वे बिखरे थे
फिर से अंकुरित होने के लिए