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अंगिका हायकू / प्रदीप प्रभात

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1.
बसंती हवा
ससरै चुनरिया
रस बुंदिया।

2.
खाली सेजोॅ मेॅ
पिया केरोॅ यादोॅ मेॅ
सालै छै छाती।

3.
याद सताबै
मनहुँ नै भाबै छै
मन उत्पाती।

4.
पतझड़ मेॅ
शोभा होय छै हा्रस
गाछ-उदास।

5.
देखोॅ प्रकृति
धरोहर संस्कृति
आरी-कियारी

6.
निहारै सीटु
टक-टक-पलाश
मोॅन-हुलास।

7.
एैलै वसंत
बालम छै महन्त
धरती संत।

8.
पिया वसंत
दुलहन धरती
मारै-कनखी।

9.
ऊ महारास
ठहाका इंजोरिया
बीचै-कन्हैया।

10.
पिया-प्रदेश
दुख लागै छै दूना
होली छै सूना।

11.
हम्मेॅ-बाबरी
मीरा नांकी नाचै छी
घुंघरू-बान्हीं।

12.
मिश्री रं बोली
जात-पात केॅ तोड़ी
धर्मो केॅ जोड़ी।

13.
कृष्ण मुरारी
उड़ाबै छै गरदा
मोहै छै राधा।

14.
होली-हुल्लड़
हिरदय हुलास
लाल-परास।

15.
चंदन बोॅन
कण-कण गमकै
विरही मन।

16.
गैया डिगरै
बछिया करै शोर
सावन-मोर।

17.
मन-बेचैन
आगिन रं झलकै
पलास-बन।

18.
मुँझौसा चान
झरोखा सेॅ निहारै
हमरोॅ-देह।

19.
अस्कल्लोॅ कृष्ण
सठ हजार गोपी
वहेॅ धरती।

20.
पिया रोॅ आश
लाल साड़ी पाड़
मोॅन-हुलाश।