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अंग देव / भाग 3 / अमरेन्द्र

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गंगा माय रोॅ वचन सुनी केॅ बोललै अंग देव“ सुनें आ गे माय
माय हमरा पर जों ऐंतनै खुश छै तेॅ दै वरदान गे माय
ई दुनियां सें कूच करौं कल, परसू तांय ही हंसलोॅ-हंसलोॅ गे माय
माय हमरोॅ जे कर्त्तव्य छेलै ऊ पूरा कैलियै गे माय“
बेटा रोॅ बात सुनी केॅ मैय्या बोलै तेॅ लागलै ”हे की मांगला हो लाल
लाल प्राणे हमरोॅ मांगी लेतिया मौत की मांगला हो लाल
जेना कि सुग्गा बिन पिंजरा कोयल बिन अमिया रोॅ बागो हो लाल
लाल सूनोॅ लागै आहने तोरोॅ बिनु हम्मू लागबै हो लाल
जेना धिया बिनु बाबा रोॅ ऐंगना लागै सूनोॅ-सूनोॅ हो लाल
लाल ओहने हमरोॅ ऐंगना लागतै तोहरोॅ बिनु हो लाल
जेना फूल फलोॅ सें खाली बाग बगीचा ऊस्सट लागै हो लाल
लाल ओकरौ सें ऊस्सट जिनगी लागतै तोहरोॅ बिनु हो लाल
आपनोॅ मौत से पहलै रे बेटा हमरे ही मौत मांगतिया हो लाल
लाल हमरा तेॅ जीत्ते जिनगी भर लेॅ सारा देला हो लाल“
माय केॅ एतना दुखी देखि केॅ बोललै ऊ धीर बंधतै“ गे माय
माय हमरोॅ एक खुशी पर अतना दुख की करबोॅ गे माय
देखलैं बड़ोॅ-बड़ोॅ बिपदा में तोहरा तेजलियौ कभियो नै गे माय
माय परबत्ता में गोड़ सुलगलै तहियो की आ गे माय
तोहरोॅ लेली हम्में गे मैय्या कैदोॅ में जल्ल दौॅ सें आ गे माय
माय खालो तक खिंचबाय केॅ कैलियै नै आहो तक गे माय
आबेॅ रोकी केॅ हमरा गे मैय्या रोकवैं लाखी लोगोॅ केॅ गे माय
माय जे विन्डोबोॅ हमरे रं होवै लेॅ चाहै छै गे माय
जे देखी कॅे बहेलियो रोॅ राजा मुर्छित होय केॅ गिरलोॅ छेलै गे माय
माय ओकरे लेॅ आपनोॅ मिरतू रोॅ भिक्छा मांगै छियौ गे माय
जेकरोॅ डरोॅ सें पातालो में दैत छिपाय केॅ हमरा कैलकै गे माय
माय पातालोॅ सें ऐलियै जेकरोॅ हांक सुनी केॅ गे माय
ओकरे लेॅ मांगौं मिरतू हम्में सपना पुरतै हेकरै सें गे माय
माय बहुत निभैलैं आबेॅ आपनोॅ वचन निभावैं गे माय
हमरोॅ मरबोॅ एक बड़ोॅ उद्देश्य लेॅ होतै आगै गंगा गे माय
माय आपनोॅ काम अधूरा केॅ पूरा हमरा करना गे माय
जे बुझलोॅ दीया केॅ हम्मे लोगोॅ रोॅ बीच जलैनें छियै गे माय
माय ओकरा लोगे लै केॅ बढ़ौ आबेॅ हम्में चाहै छी गे माय
हमरोॅ रहला सें लोगे चहतै हम्मी ओकरोॅ अगुआ रहियै गे माय
माय यै सें होतै न पूरा कभियो पुनीत उदेश गे माय
हमरोॅ रहला सें आपनोॅ हितकेॅ आपने सें देखतै कोय्यो नै गे माय
माय तेॅ हीं सें हम्में आपनोॅ मिरतू तोहरा सें मांगौं गे माय“
”एतना बड़ोॅ उदेश लेॅ तोहें मिरतू जे चाहैं छैं हमरो हो लाल
लाल केना रोकौं तोहरोॅ माय होय क्षुद्र कहैबै हो लाल
मंदारे पर्वत उ छाती पर राखबै तोहरोॅ किंछा लेली हो लाल
लाल पूरा हुवौ हो तोहरोॅ किंछा तोहरोॅ उदेश हो लाल“
एतना कही केॅ गंगा मैय्यां चूमी लेलकै गोद में लै केॅ हो लाल
राम अंगो देव कंदबें नांखी खिली-खिली गेलै हो राम
महीना बितलै एक दिन लौआ लोंगांय रोॅ भुईयां फाड़ी केॅ हो राम
राम वोही सें एकठा हांय-हांय करतेॅ दैंत निकल्लै हो राम
एकदम आंधिये रं हो मैय्या चाल शकल सें छिनमान होने हो राम
राम कुंडोॅ में जरतेॅ आगे नांखी आँख बुझ बै हो राम
झांटोॅ, झौआ, कासोॅ नांखी मुंहो सुरंगे नांखा लागै हो राम
राम जेकरा में जिह्वा सांपे नांखी करबट मारै हो राम
पंजा ठीक डमोले नांखी देह पहाड़ो सें भारी लागै हो राम
राम गोड़ चलै तेॅ कोस भरी रोॅ भुईयां दलकै हो राम
जेकरोॅ सांस बैशाखोॅ रोॅ तिक्खोॅ धूप केॅ मात करै छै हो राम
राम जेकरोॅ हांक सुनी केॅ लागै सरंगा फटतै हो राम
कुछछू देर रही केॅ फेरु वायु बनी केॅ बिलैलै दैंत हो राम
राम वायु बनी केॅ ब्रह्मा जी रोॅ पास पहुँचलै हो राम
बीस बरस तांय कैलकै दैतें घोर तपस्या आसन मारि केॅ हो राम
राम आखिर ब्रह्यौं जी खुश होय कहलकै वर मांगै लेॅ हो राम
नांची-नांची बोॅर मांगलकै दैतें बीस ठहाका दै केॅ हो राम
रात दैतें कहलकै देवतौ रोॅ देवता तोंही सुरेश हो राम
हमरा दा वरदान कि अपने हाथोॅ सें मारौं अंग देव हो राम
राम हम्मू आपनोॅ परतापोॅ केॅ जग में दिखइयै हो राम
सुनथैं सरंगोॅ रोॅ देवी-देवता ढाढ़ मारि केॅ कानै लागलै हो राम
राम भोकरी-भोकरी सूरजो कानलै सरंगोॅ सें होनै हो राम
ब्रम्हौ जी तेॅ वचन सें बंधलोॅ बोललै हैत होतै निश्चय हो राम
राम कहियो नै होतै मतुर इ तोहरोॅ हाथोॅ सें मरतै हो राम
गंगा माय रोॅ पूत मनौती केॅ मारना की तोरा सें होतौ हो राम
राम एकरा लेॅ हमरै जाबै लेॅ पड़ते धरती पर हो राम
ओकरा तेॅ मिरतू रोॅ देवथौं यमराजौं नैं मारेॅ पारेॅ हो राम
राम नेम धरम सब तोड़ी केॅ हमरै जाबै लेॅ लागतै हो राम
आखिर एक दिन समय देखी केॅ सरंगोॅ सें ऐलै ब्रम्हा जी हो राम
राम हाथोॅ में लेलेॅ सोन-कलश अमरित केरोॅ हो राम
धूप छेलै कड़कड़िया दिनो तावोॅ सें छकछक लाल छेलै हो राम
राम हफसै छेलै बाग-बगीचा हवौं-बतास हो राम
गंगा मैय्या कोशी मैय्या चाननी मैय्या सुख लोॅ-सुख लोॅ हो राम
राम एकदम उस्सट रीतु छेलै जेहनोॅ मिरतु हो राम
अंग देव छहारी में बैठलोॅ घोर तपासोॅ में हंसमुखिया हो राम
राम की-की सोचै, मुस्कै कखनू, कखनू गुम हो राम
कखनू खड़ा तुरत होय जाय छै घोड़ा सें कुछ कुछ बोलै छै हो राम
राम बात सुनी केॅ घोड़ा उछलै ताड़ी सें जादा हो राम
अंग देव रोॅ कुतियौं बुझलकै अंग देव रोॅ हिरदय केॅ हो राम
राम दीयै तेॅ लागलै तिरफेकन नि शिवलालौॅ के हो राम
शिवलालें आखिर दोनों केॅ आपनोॅ दोनों हाथ में लै केॅ राम
राम चूमै तेॅ लागलै घुरि-घुरि दोनों केॅ बोलै तेॅ लागले हो राम
पनरह रोज मनैलकै दोनों केॅ पनरह रोज वहीं पेॅ रहि केॅ हो राम
राम उत्तरें गेलै घोड़ा, कुतिया दखिनें जे गेलै हो राम
दिनकोॅ धूप छपी रैल्होॅ छेलै गंगा माय रोॅ अंचरा तर हो राम
राम संझबाती झुकझुक हूवेॅ लागलोॅ छेलै सबटा हो राम
देखि अकेलोॅ अंग देव केॅ ब्रम्हा जी परगट भै गेलै हो राम
राम बोललै हम्में तोरोॅ रक्षक ब्रम्हा कहाबौं हो राम
दिन भर रोॅ जरलोॅ तावोॅ सें तोहरो कंठ होतौं सुखलो हो राम
राम तोरा लेॅ अमरित लानलें छियौं प्यास बुझाबोॅ हो राम
प्यास नै छेलै तहियो देखी केॅ ब्रम्हा जी ही ऐलोॅ छै हो राम
राम गदगद भै केॅ कलश लगैलकै आपनोॅ मूं सें हो राम
देखथै-देखथैं अमरित उजरोॅ सें कारोॅ सब हुवेॅ तेॅ लागलै हो राम
राम पीथैं-पीथैं अंग देवो नि करिया भेलै हो राम
जेना-जेना अंग देवता होवै ठंडा होनै होनै गरमियो बढ़लै हो राम
राम होनै होनै गंगा, कोशी, चानन, मैया खोलै हो राम
अंग देव रोॅ देहोॅ सें अपने आप सुलगलै आगिन लहकी हो राम
राम तीने रे क्षण में कंचन कायो भषम उड़ाबै हो राम
दोड़लै गंगा, कोशी, चाननो माय बेटा रॉ भषम लियै लेॅ हो राम
राम बेटा रोॅ भषम समेटी केॅ लौटलै हंकरी-हंकरी हो राम
भादोॅ रोॅ रात में तीनो अभियो पीटि-पीटि छाती कानै हो राम
राम ठाड़ी कभियो, कभियो पछाड़ खाय बेआ रोॅ दुख में हो राम
कास, पलाश, विरिछ सबटा भेलै टूअर टुकटुक ताकै छै हो राम
राम अंग देव केॅ पंथ निहारै बारहो मास हो राम
बारहो मास उपास करै छै गंगा, कोशी, चानन मैय्यो हो राम
राम तीनों चाहै तीन-तीन अंग देव अबकी जनम में हो राम
होलोॅ छै आकाश सें भाषण पुरतै किंछा तीनों बहिन रोॅ हो राम
राम होतै अबकी तीन-तीन अंग देव अबकी जनम में हो राम
ई बचनोॅ केॅ सुनी केॅ गंगा, कोशी, चानन खलखल हांसै हो राम
राम छमछम नांचै छै आरो मास में खमखम भादोॅ में हो राम
भादोॅ में जे भाब उठै छै गंगा, कोशी, चानन केॅ हो राम
राम मास-मास भरि तांडव करथैं तीनोॅ केॅ बीतै हो राम
तखानी देव पितर आरो मानुख खाली अंग देवे ध्याबै हो राम
राम अरज करै सब कहिया लेवा तोंय अवतार हो राम