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अंत्री-मंत्री, नेता-वेता-सब्भे बात हटावोॅ / अमरेन्द्र

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अत्री-मंत्री, नेता-वेता-सब्भे हटावोॅ
ढूंढोॅ जात रोॅ पोठिया संुगठी-जे चुनाव रोॅ मंत्र
वहीं चलैतौं रजधानी सेँ रजधानी रोॅ तंत्र
झुट्ठे न्याय-नीति मेँ अपनोॅ मन नै जरो बँटावोॅ
वर्णाश्रम रोॅ देश-वर्ण पर सब्भे तंत्रो चलतै
प्रजातंत्र मेँ कौरवे नाँखी सौ गो भय्यै अच्छा
जे परिवार सीमित करवैतै खैतें पहिलैं गच्चा
सांसद सें मुखिया-चुनाव ताँय हाथे मलतै
सँकरा मेँ फँसलोॅ निनौन छै-जी-गालोॅ रोॅ
दाँतै केरोॅ मौज-चबावै, निगली जाय छै
एक्के मुँह मेँ सटलोॅ-सटलोॅ बत्तीस भाय छै
लोकतंत्र ई-चाल पचीसी बैतालोॅ रोॅ
चरकोॅ पर चरका मारोॅ पर करिये ऐतौं
मन्तरिया केॅ छोड़ी आरो के भेद बतैतौं?श