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अचार की डेलियाँ और गस्से रोटी के / आनंद खत्री

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बेइन्तहाँ अचार की डेलियाँ
रोम-रोम मसाले तर-बतर
नाख़ून के सिन्के में दाग़
अब भी गस्से मुलाकातों के
किस्मत की थाली से तोड़ के
कुछ अचारी यादों के मसाले
कोने से छुआ के चपाती का निवाला
दाँतों से पीस कर
सूखी रोटी के वज़ूद का
बदलता हुआ स्वाद
आहा !

सजी हुई कटोरियों की ताज़ी तरकारी
को अब क्या समझायें?
मुझे ये आचार की टुकड़ियों को
जीभ पे चलाना,
दबा के उभरते स्वाद का मज़ा,
एक खट्टी बिखरी डकार में बिखेरना
पसंद है।