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अच्छा नहीं लगता ... / ज्योत्स्ना शर्मा

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चमन बेज़ार हो सारा मुझे अच्छा नहीं लगता ,
हवा हो जाए आवारा मुझे अच्छा नहीं लगता ।१

मेरे हिस्से की,कुछ खुशियाँ ,उसे भी तुम अता करना ,
कहीं दिल दर्द का मारा मुझे अच्छा नहीं लगता ।२

तुम्हारी रहमतों में भी सुकूँ से सो नहीं पाती ,
कोई बेघर, हो बेचारा मुझे अच्छा नहीं लगता ।३

बुलंदी और ये शुह्रत मुबारक हो तुम्हें साथी ,
हो मेरे नाम का नारा मुझे अच्छा नहीं लगता ।४

कभी ख्वाहिश कोई मेरी अधूरी हो ,न हो पूरी ,
फलक से टूटता तारा मुझे अच्छा नहीं लगता ।५