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अमुक भाई वालई खऽ राखड़ी भरात / निमाड़ी

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

अमुक भाई वालई खऽ राखड़ी भरात,
पिया हमखऽ दे राखड़ी घड़ई देव, असी गरमी से।
उंढालई सेज पिया मोहे न सुहाये,
जुदा जुदा पलंग तुलई देव, असी गरमी से।
चौमासा की सेज पिया मोहे न सुहाये,
पिया हमखऽ ते पियर पहुँचई देव, असी गरमी से।
स्याला की सेज पिया बहुत रसालई,
पिया हमखऽ ते हिया सी लगई लेव, इनी गरमी से।