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अरजी बरजी करइ छोटकी ननदिया / मगही

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मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

अरजी बरजी[1] करइ छोटकी ननदिया।
आइ रे गेलइ इहमा[2] मास रे फगुनमा[3]॥1॥
जो तोंहे जइहऽ भउजी, अपन कोहबरवा।
भइया से कहि मोरा, रखिहऽ नेअरबा[4]॥2॥
नहीं माँगू थारी[5] लोटा, नहीं माँगू धनमा।
एक हम माँगू भउजी, सिर के सेनुरबा।
एक हम माँगू भउजी, तोहरो सोहगबा॥

शब्दार्थ
  1. अरजी-बरजी = प्रार्थना
  2. यहाँ
  3. फाल्गुन
  4. ससुराल जाने के लिए दिन निश्चित करना
  5. थाली