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अर्थो के जुगोॅ में हम्में अर्थो के अभाव में छी / अनिल शंकर झा

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अर्थो के जुगोॅ में हम्में अर्थो के अभाव में छी
जिनगी बेरथ जेना कोनो ढेला रस्ता के।
जहीं चाहै लातीं मारै गोडो तर्रे दाबी दहै
जेना कोनो माछी मच्छर हेनो जानो सस्ता के।
पर्व आ तेहार आबै छाती तरें प्राणो काँपै
बच्चा बुतरू मलकाठें नेना देवी गछता के।
दिनें राती रोजे खर्टो घामॅ सें धरा केॅ पार्टो
कोढ़ी धुम्मा तैय्यौे सुनौ गारी खाना नस्ता के॥