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अवधपुरी मे चैन परे न / बुन्देली

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

अवधपुरी में चैन परे न,
बनखों गये रघुराई मोरे लाल
रामलखन और जनकदुलारी,
अब न परत रहाई मोरे लाल
सब रनवास लगत है सूनो,
रोवे कौशला माई मोरे लाल
नगर अयोध्या के सब नर-नारी,
सबरे में उदासी छाई मोरे लाल
जब रथ भयो नगर के बाहर,
दशरथ प्राण गये हैं मोरे लाल
चौदह साल रहे ते वन में,
सहो कठिन दुखदाई मोरे लाल
वन-वन भटकी परी मुसीबत,
शोक सिया खों भारी मोरे लाल