भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

अवषेशों से घिन्नाती / चंद्र रेखा ढडवाल

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

ठण्डी हवा में टहलते
कभी जलती आग पर हाथ ताने
घरों के बाहर मर्द
दुनिया भर की मुश्किलों पर
हलकान होते हैं
 ***
भीतर औरतें
रात का खाना पकातीं
सुबह के नाश्ते की तैयारी
और खाने वालों की
इच्छा / अनिच्छा दोहराते
गुनगुनाती हैं
बहस पर चौंकती
तो ठण्डा-गर्म परोसते
सेंध लगातीं
लौटकर झाड़तीं हाथ
धो लेतीं हाथ
ढाँपने की कोशिश करती
नाक पल्लू से
जीवित मृत बामियों के
अवशेषों से घिन्नातीं