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अहे हँकरहो नगर के बाभन, दिबस हे गुनाय देहो हे / अंगिका लोकगीत

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

पंडित द्वारा शुभलग्न दिखलाकर औषधि लाई जाती है तथा उसे कुमारी कन्या द्वारा पिसवाकर सभी रानियाँ पीती हैं। तीनों गर्भवती हो जाती हैं और यथासमय तीनों पुत्रवती भी होती हैं।
इस गीत में दिशाआंे के शुभाशुभ का भी उल्लेख है।

अहे हँकरहो[1] नगर के बाभन, दिबस हे गुनाय देहो हे।
ललना रे, कौन नछतर[2] तोड़ी क आनब[3], कोसिला रानी ओखध[4] भल हे॥1॥
अहे कहमा सेॅ आनब लोढ़िया[5] कहमा सेॅ आनब सिलोट[6] भल हे।
ललना रे, कहमा सेॅ कनिया रे कुमारी, ओखध पीसि पिआएति हे॥2॥
अहे गंगा सेॅ आनब गँगरोटिया, अवध सेॅ लोढ़िया हे।
ललना रे, घरहिं में कनिया रे कुमारी, ओखध पीसि पिआएति हे॥3॥
कौने मुख राखब लोढ़िया, कौने मुख सिलोट भल हे।
ललना रे, कौने मुख भरब रे कटोर, कौने मुख ओखध भल पीअति हे॥4॥
दछिन मुख राखब रे लोढ़िया, पछिम मुख सिलोट भल हे।
सुरुज मुख[7] भरब रे कटोरा, पीसि रानी पीअति हे॥5॥
आहे पहिने[8] जे पिअलक रानी कोसिला, तब रानी कंकइ न हे।
ललना रे, सिला धोइ पिअलक रानी रे सुमिंतरा, तीनों ही रानी गरभ सेॅ हे॥6॥
कोसिला के जनमल राजा रामचंदर, भरथ कंकइ के जनमल हे।
ललना रे, सुमितरा के जलमल लछुमन, तीनों घर बधाबा बाजै हे॥7॥
पिन्हिए ओढ़िए दगरिन ठाढ़ि भेली, दोनो कल[9] जोरिए हे।
ललना रे, करहो राजा हमरो बिदाई, पुतर फल पैलें हे॥8॥

शब्दार्थ
  1. बुलाओ; पुकारो
  2. नक्षत्र
  3. लाऊँगा
  4. औषधि
  5. लोढ़ा; सिल पर पीसने के लिए पत्थर का बना हुआ लम्बोतरा टुकड़ा
  6. सिल
  7. पूर्व दिशा
  8. पहले
  9. हाथ जोड़कर; कर जोड़कर