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आंगण कोड मनावै / राजेश कुमार व्यास

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जद
घरै आवै मां
आंगण कोड मनावै
अेकलेपण रै
जंजाळ सूं निकळता
टाबर भेळा होय’र
पूग जावै आपरी दारी रै कनै
सब खातर
कीं न कीं
लाई है मां
मां
नै सगळा री ही फिकर है
खांसी रूकै कोनी
पण
पैली पूछै
थूं नींद तो पूरी लैवे?
म्हूं
याद करूं
मां बालपणै मांय
सूतै नै कदेई नीं जगावती
कैवती
थोड़ी क ताळ
तो सूवण दां
नींद कठै पड़ी है
मां
ठीक ही कैवती
नींद आणी सोरी नीं है।