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आईना रूठ गया है तेरे जाने के बाद / अर्पित शर्मा 'अर्पित'

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आईना रूठ गया है तेरे जाने के बाद
एक अंधेरा सा बिछा है तेरे जाने के बाद

किस क़दर टूट के बरसे है ये बादल ग़म के
आसमाँ चीख़ उठा है तेरे जाने के बाद

दिल के टुकड़े हुए बरसात हुई अश्को की
क्या कहूँ क्या क्या हुआ है तेरे जाने के बाद

ज़ेहन भी चुप है ज़ुबा चुप है नज़र भी चुप है
हमने भी कुछ न कहा है तेरे जाने के बाद

चीख़ता खंडर है रोती है हवेली दिल की
घर ये आसेब-ज़दा है तेरे जाने के बाद

घर में दीपक ही जला है न कोई शम्मे वफ़ा
मुद्दतो दिल ही जला है तेरे जाने के बाद

ये ज़माना ही नहीं ख़ुद से भी "अर्पित" मुझको
कुछ तअल्लुक़ न रहा है तेरे जाने के बाद