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आज अनंद भलइ हमर नगरी / मगही

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मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

बधैया

आज अनंद भलइ[1] हमर नगरी।
मोर दादा लुटावे अनधन सोना, मोर दादी लुटावे मोती के लरी[2]॥1॥
बाबूजी लुटावथ[3] कोठी-अटारी, मइया लुटाबे फूल के झरी।
मोबारख[4] होय होरिला तोहरो गली॥2॥

शब्दार्थ
  1. हुआ
  2. लड़ी
  3. लुटाते हैं
  4. मुबारक। बधाई के अर्थ में प्रयुक्त बरकत का हेतु, सौभाग्यशाली