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आज होरिलवा के देखन चलूं / मगही

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मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

न्योछन

आज होरिलवा के देखन चलूं।
आज होरिलवा के चूमन चलूँ॥1॥
मोर होरिलवा हइ[1] पुनियाँ[2] के चनवा[3]
अपन होरिलवा के खेलावँन[4] चलूँ॥2॥
राइ[5] नोन[6] लेके निहुँछन[7] चलूँ।
अपन-अपन नजरी[8]

शब्दार्थ
  1. है
  2. पूर्णिमा
  3. चाँद
  4. खेलाने
  5. छोटी सरसों, जिसका उपयोग मसाले में होता है।
  6. नमक
  7. ओंइछन। निछावर करने के लिए। एक प्रकार का उपचार, जिसमें किसी के कुशल-क्षेम या रक्षा के लिए राई-नोन या कोई अन्य द्रव्य उसके सिर या सभी अंगों के ऊपर से घुमाकर फेंक दिया जाता है या कहीं बाहर अथवा आग में डाल दिया जाता है, जिससे शिशु कुदृष्टि के दुष्परिणामों से सुरक्षित रहता है।
  8. नजर, दृष्टि