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आदमी? / रामेश्वरलाल खंडेलवाल 'तरुण'

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आदमी: आड़े-टेके-फेंक-दिये-गए अनादि बीज की-
कोई ऊल-जलूल उपज?

आदमी: काल के अन्धकार को चीर कर जाता हुआ-
प्रकाश का अग्निमुख अलक्षित तीर?

आदमी: छिपकली की ताजी कटी असहाय तड़फड़ाती
पूँछ ?
आदमी: अमर, स्वर्णिम, दिव्य चेतना का सुगंधों-भरा-
रंग-बिरंगा पुष्प?-

आदमी: जो साँप को डस ले तो साँप पानी न माँगे?
या
आदमी: कबाड़खाने का लौह-लक्कड़?
जो ऊपर से फेंक दिया गया है-रिजेक्टेड,
धरती की वेस्ट-पेपर बास्केट में-
साहब के द्वारा फाड़-फेंक दिये गए रद्दी के टुकड़े-सा?