भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

आपुन मरन त्यौहार / प्रेम शर्मा

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

बरसों के बाद
मिला
     अपना
     बिछुड़ा यार,
घिर-घिर आई
बादली,
     उमड़ा
     मेघ-मल्हार।
           

सुन-सुन
धुन
मगन हुआ
     सहजानन्दी
     चोला,
मुखरित
अन्तर्ध्वनियाँ
जुग-जुग का अनबोला,
     रिमझिम-रिमझिम
     नेहा
     गलबहियों का
     हार,
पुरइन पात
दुलारती
     पुरवा चली
     बयार।
          
नाची
नैना-जोगिन
होशमंद दीवाने ,
     छलकी
     अनहद हाला
     दरियादिल पैमाने,
जोगिया
हुई महफ़िल
हाल में दीदार,
     चन्दन-चिता
     सजाओ रे,
     आपुन मरन-त्यौहार।

(आजकल, नवम्बर, 1998)