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आबेॅ बीती चललै प्राण के विहान रे / गंगा प्रसाद राव

आबेॅ बीती चललै प्राण के विहान रे
कुम्हलैलै सुक्खोॅ के गुलदौदी फूल
पड़लोॅ छै जेकरा पर दुक्खोॅ के धूल
टुटलै सब मन के गुमान रे
सोचै छै सूना में आबेॅ देवदास
मारल्है पर लिखलोॅ छै पारो के पास
खसी गेलै प्रेम के मचान रे
कानै तेॅ सूना में देखै नै लोग
आंखीं केॅ लागलोॅ छै कपसै के रोग
हिरदय में हुनके धियान रे
हँसबोॅ हँसैवो ऊ बैठी केॅ संग
गेलै सब गेलै ऊ प्राणोॅ के रंग
जिनगी भै गेलै मशान रे
आबेॅ जों हुनकोॅ नै हमरा छै साथ
कथी लेॅ होय छै करैतोॅ रं रात
चाहै छै उठै लेॅ जान रे
पछिया बयारोॅ में पुरवा के रोग
जिनगी में भोगै की यहूँ भी भोग
भूमिका जे छेलै भेलै गान रे