भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

आलिंगन का स्वाद / समीर बरन नन्दी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

जंगली डगर पर चल रहा हूँ अकेला
फिर भी अकेला नहीं हूँ ।

हे जीवन... हे जीवन... वादा करो
नदी पर आकर इस जंगल के आगोश में
रोज़ कुछ समय बिताओगे ।

अपने आप से मिलकर
यहीं सेमल के बीज की तरह
कुलाचे मारता है मन-यौवन ।

कैसे छोड़ सकता हूँ
इस एकांत में --
इस आलिंगन का स्वाद ।