भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

आवत है बन ते मनमोहन / रसखान

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

आवत है बन ते मनमोहन, गाइन संग लसै ब्रज-ग्वाला।
बेनु बजावत गावत गीत, अभीत इतै करिगौ कछु ख्याला।
हेरत हेरि चकै चहुँ ओर ते झाँकी झरोखन तै ब्रजबाला।
देखि सुआनन को रसखानि तज्यौ सब द्योस को ताप कसाला।