भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

आ अस्सी मन पथलबा ओकरा / मैथिली लोकगीत

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मैथिली लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

आ अस्सी मन पथलबा ओकरा
छाती पर चढ़ा देलकै यौ।
हौ नारायण जुलुम बीतै छै
हजमा बान्हल तीसीपुरमे।
आ अन्हेरबाट बनिसार जे देलकै।
दिन ओरैलय महिसौथामे
सात दिन हपता जे पुरलय
मनेमन साँमैर सोचै छै
सुनऽ-सुनऽ हौ सुग्गा हीरामनि
दिन के वार्त्ता तोरा कहै छी
जुलुम भऽ गेल राज महिसौथा
आ अगुआ पठौलीयै आइ लौटकऽ नहि
एलै हौ।