भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

इक नुकता यार पढ़ाया ए। / बुल्ले शाह

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

इक नुकता यार पढ़ाया ए।
इक नुकता यार पढ़ाया ए।

ऐन गैन दी हिक्का[1] सूरत,
हिक्क नुकते शोर मचाया ए।
इक नुकता यार पढ़ाया ए।

सस्सी दा दिल लुट्टण कारन,
होत पुनूँ बण आया ए।
इक नुकता यार पढ़ाया ए।

बुल्ला सहु दी जात ना कोई,
मैं सहु अनायत[2] पाया ए।
इक नुकता यार पढ़ाया ए।

ऐन गैन दी हिक्का सूरत,
हिक्क नुकते शोर मचाया ए।
इक नुकता यार पढ़ाया ए।

शब्दार्थ
  1. एक ही, एकमात्र
  2. बुल्ले शाह के गुरु का नाम