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उड़ा कबूतर / रमेश तैलंग

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में...में बकरी मटक-मटक
चली तो रस्ता गई भटक ।
ब-ब-बचाओ ! गले में उसके-
बोली निकली अटक-अटक ।

००

टिक-टिक घोड़ा टिम्मक-टिम ।
चलता डिम्मक-डिम्मक डिम ।
जिसने छोड़ी ज़रा लगाम ।
धरती पर आ गिरा धड़ाम ।

००

उड़ा कबूतर, ऊपर-ऊपर !
कित्ते ऊपर ? इत्ते ऊपर ।
नीचे कब तक आएगा ?
उड़कर जब थक जाएगा।