भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

उदयप्रकाश से / अनिल जनविजय

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


पहले तुम
कविता लिखते थे
इतनी अच्छी

अब क्या हो गया तुम्हें
बतलाओ ज़रा
इधर-उधर फैली बातों को
झुठलाओ ज़रा

कहना सब बातें तुम लेकिन
सच्ची-सच्ची
और फिर से कविता लिखना तुम
वैसी ही अच्छी


रचनाकाल : 1996