भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

उलारा / मुंशी रहमान खान

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मारयो नांव खेवैय्या दुश्‍मन मारयो नांव खेवैय्या हो।
रौवै भारत मैय्या दुश्‍मन मारयो नांव खेवैय्या हो।।1

नहिं कोई हुआ न हुइ है ऐसा दिलका धीर धरैय्या।
दुश्‍मन मारयो नांव खेवैय्या हो।।2

बड़े बड़े शूरवीर भए भारत गांधी सन्‍मुख पैय्या।
दुश्‍मन मारयो नांव खेवैय्या हो।।3

चारौ युग में नहिं कोई जन्मा ऐसा कुंवर कन्‍हैया
दुश्‍मन मारयो नांव खेवैय्या हो।।4