भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

एक आहट सी आ रही है अभी / वर्षा सिंह

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

एक आहट सी आ रही है अभी ।
ज़िन्दगी गुनगुना रही है अभी ।
होगी ‘वर्षा’ सुखन की, शेरों की
शायरी मुस्कुरा रही है अभी ।