भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

एक दिन चूक जात सब कोई / ईसुरी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

एक दिन चूक जात सब कोई
केसऊ स्यानों होई।
हय गज दन्त पुनीत चड़इया।
चूक जात जे दोई।
चूक जात मानस परखइया।
परख रहे हैं खोई।
चूकजात पुरानिक पाँडे
वैरागी तपसोई।
ईसुर कात चुगत न चूकै।
होवै बड़ो अनोई।