कविता का शैशव, किशोर होता जाता था।
मीरा के दृग से, कबीर रोता जाता था।
पीर की उषा मुस्कुराई ‘शिशु’ के आनन पर-
पौ फटती जाती थी, भोर होता जाता था।
कविता का शैशव, किशोर होता जाता था।
मीरा के दृग से, कबीर रोता जाता था।
पीर की उषा मुस्कुराई ‘शिशु’ के आनन पर-
पौ फटती जाती थी, भोर होता जाता था।