भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

एहसास / अबरार आज़मी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

लम्हात का हयूला कुछ भूलने लगा था
आवाज़ का सरापा कुछ ऊँघने लगा था
सन्नाटा पा-शिकस्ता कुछ बोलने लगा था
वहश्त-ज़दा सा कमरा कुछ ढूँडने लगा था
मेरा शुऊर ज़द में तहत-ए-शुऊर की था