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ओळूं आई / सिया चौधरी

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ओळूं आई...
मां रै सागै थांरी
करती ही हथाई
फेर आ जावती लाज
जद मां बतावती
सासरियै री कोई बात....।
 
म्हनैं पाछी
मधरै वायरै-सी
ओळूं आई...
बैनां चिड़ावती,
हंसती अर कैवती-
ओ लाडेसर जीजी!
थांरो ब्यांव करांला
कैर रै उपराळै बैठा....।
 
फेर कठै सूं
थाक्योड़ी-सी म्हनैं
ओळूं आई....
बिना खोट, क्यूं थे
भेज दियो संदेसो
कै नीं आवैली
म्हारै मांढै ऊपरां
थांरी बरात....।