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कटोरनि पियली कोसिला रानी, अउरो सुमिन्त्रा रानी हे / मगही

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मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

कटोरनि[1] पियली कोसिला रानी, अउरो सुमिन्त्रा रानी हे।
ए ललना, सिलि[2] धोइ पियलन केकइ रानी, तीनों रानी गरभ से हे॥1॥
कोसिला रानी के मुँह पियराएल, देह दुबराएल[3] हे।
ए ललना, दसरथ मनहिं अनन्दे, कोसिला जरि[4] रोपली हे॥2॥
आधी राति बीतले पहर राति बीतले हे।
ए ललना, कोसिला के भेल[5] राजा रामचंदर, सुमित्रा के लछुमन हे॥3॥
ए ललना, ककइ के भरथ भुआल,[6] तीनों महल सोहर हे॥4॥
दुअरा से बोलथिन[7] राजा दसरथ, सुन ए कोसिला रानी।
ए रानी जी, कउन[8] बरत रउरा[9] कएल कि राम फलवा पाएल हे॥5॥
सउरी[10] से बोलथिन कोसिला रानी, सुन राजा दसरथ जी।
ए राजा, बरत कइली एतवार, त राम फल पइली हे॥6॥
कातिक मासे हम नेहइली, तुलसी दिया बरली[11] हे।
ए राजा, भूखल[12] बराम्हन जेववली,[13] त राम फल पइली हे॥7॥
माघ मासे नेहइली,[14] अगनियाँ[15] न तपली[16] हे।
ए राजा, एहो कस्ट सहली, राम फल पइली हे॥8॥
बैसाखहिं मासे नेहइली सुरूज गोड़ लगली[17] हे।
ए राजा, टूअर[18] भगिना का पालली, त राम फल पइली हे॥9॥
दुअरा से बोलथिन राजा दसरथ, सुन ए कोसिला रानी हे।
ए रानी, सेर जोखि[19] सोनवा लुटाएब, पसेरी जोखि रूपवा[20] हे॥10॥
ए रानी जी, सँउसे अजोधया लुटएबो, त राम के बधइया में॥11॥
सउरी से बोलथिन केकइ रानी, सुन राजा दसरथ।
ए राजा, कोसिला के भेल रामचंदर, सुमित्रा के लछुमन हे॥12॥
ए राजा, केकइ के भरथ भुआल, जानि-बुझि[21] अजोधेया लुटइह।
ए राजा, रामजी लिखल बनवास, अजोधेया मत लुटइह॥13॥
सउरी से बोलथिन कोसिला रानी, सुन राजा दसरथ जी।
राजा, छुटले[22] बँझिनियाँ के नाम, बलइए से[23] राम बन जइहें,
बन से लवटि अइहें हे॥14॥

शब्दार्थ
  1. कटोरे-कटोरे
  2. सिल, सिलौट
  3. मुँह पीला होना और देह दुबलाना, गर्भ-धारण का चिह्न है।
  4. जड़ रोप दिया, वंश बचा लिया
  5. हुए
  6. भूपाल
  7. बोलते हैं
  8. कौन
  9. आप
  10. सौरीघर
  11. बाला, जलाया
  12. भूखा
  13. जेवनार कराया, भोजन कराया
  14. स्नान किया
  15. अग्नि
  16. तापना, सेवन करना
  17. गोड़ लगना = चरण पर गिरना, प्रणाम करना
  18. मातृ-पितृहीन
  19. तौलकर
  20. सम्पूर्ण, समग्र
  21. समझ-बूझकर
  22. छूट गया, मिट गया
  23. बला से