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कपड़ा, नौका औ’ पदत्राण / हरिवंश राय बच्चन / विलियम बटलर येट्स

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'किसका कपड़ा सीते हो तुम इतना सुन्दर और द्युतिमान ?’

’यह कपड़ा तन पर धारण कर
बाहर निकलेगा अवसाद,
जो देखेगा उसकी पलकों
पर छा जाएगा उन्माद ।’
'किसका कपड़ा सीते हो तुम इतना सुन्दर और द्युतिमान ?’

किसकी नाव सजाते हो तुम पालों को अम्बर में तान ?’
’इस पर चढ़ अवसाद करेगा
आँसू के सागर को पार,
आह भरी पालों के बल पर
डाण्ड न लेगा, या पतवार ।’
किसकी नाव सजाते हो तुम पालों को अम्बर में तान ?’

’ऊन सफ़ेद लगाकर बुनते हो किन पाँवों के पदत्राण ?’
’इन्हें पहन अवसाद चलेगा
जीवन के पथ पर अनजान,
जिससे उसकी पद-चापों की
ओर न जाए जग का ध्यान ।’
’ऊन सफ़ेद लगाकर बुनते हो किन पाँवों के पदत्राण ?’

मूल अँग्रेज़ी से हरिवंश राय बच्चन द्वारा अनूदित

लीजिए अब पढ़िए यही कविता मूल अँग्रेज़ी में
          William Butler Yeats
The Cloak, The Boat And The Shoes

'What do you make so fair and bright?'

'I make the cloak of Sorrow:
O lovely to see in all men's sight
Shall be the cloak of Sorrow,
In all men's sight.'

'What do you build with sails for flight?'

'I build a boat for Sorrow:
O swift on the seas all day and night
Saileth the rover Sorrow,
All day and night.'

What do you weave with wool so white?'

'I weave the shoes of Sorrow:
Soundless shall be the footfall light
In all men's ears of Sorrow,
Sudden and light.'