भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

कभी थकन के असर का पता नहीं चलता / मुनव्वर राना

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


कभी थकन के असर का पता नहीं चलता
वो साथ हो तो सफर का पता नहीं चलता

वही हुआ कि मैं आँखों में उसकी डूब गया
वो कह रहा था भँवर का पता नहीं चलता