भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

करमा गीत-5 / छत्तीसगढ़ी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

ओ हो रे हाय रात झिम झिम करे
उठ देवता कंदरा बजावो हो।
रात झिम झिम करे।
कय दो मोहर कर केंदरा रे केन्दरा
कय दो मोहर ओकर तार हो।
रात झिम झिम करे...
दसे मोहर कर केन्दरा रे केन्दरा
बीस मोहर ओकर तार हो।
रात झिम झिम करे...
हल जोती आवे कुक्षारी भाजे आवे,
लगे देवरा केन्दरी बजावा हो।
रात झिम झिम करे...
फूट गये केन्दरा
टूट गये तार हो,
कइसे बजावौ गाई केन्दरा हो।
रात झिम झिम करे...
तुंहर बने केन्दरा
तुंहर बने तार हो
कइसे पतियांवन तुंहर बात हो
रात झिम झिम करे...