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करम / हरीश बी० शर्मा

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किसन तो हर जुग में
निमत्त बण्यो
आवै है
जुग तारण नैं
रच्यौड़ै कुरूखेतर में,
उपदेसी हैं
ईं कारणै समझावै है जुगसांच
कौरवां नै पांडवां नैं
ऊंच-नीच।
पण अरजुण ही जाणै
‘मा फलेषु कदाचन’।