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कविता की मशाल / नवारुण भट्टाचार्य / मीता दास

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किस-किसने बारूद जमा किया है
वे कौन हैं, जिन्होंने जमा किया है पेट्रोल
ख़ाली बोतलों में
मलोटाभ कॉकटेल बनाने लिए

कौन-कौन हैं वे
जुगनुओं के क़रीब
अन्धकार के जल उठने का पाठ सीख रहे हैं

कौन रिसर्च कर रहा है
दहन और विस्फोरण के
अल्केमिय रहस्य के बारे में

कौन-कौन अपने ह्रदयपिण्ड को
ग्रेनेड में बदलना चाहते हैं
मरते-मरते भी
बचा लेना चाहता है कौन माचिस की तीली

मैं जी -जान से ढूँढ़ रहा हूँ
उनके चेहरे
कविता की मशाल की रौशनी में ।

मूल बांग्ला से हिन्दी में अनुवाद : मीता दास