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कागज कौ तौ भन्ना भर दऔ / महेश कटारे सुगम

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कागज कौ तौ भन्ना भर दऔ ।
लिख-लिख कें पोथन्ना धर दऔ ।

चार किताबें छपवावे में,
सौनौं चांदी गानें धर दऔ ।

अब जो हुइयै देखी जैहै,
अपनौ काम तौ पूरौ कर दऔ ।

छपवे की गुंजाईश नइयाँ,
सो लिखवौ बन्दई सौ कर दऔ ।

देख डायरीँ घर के कत हैं,
कूरा सें घर घूरौ कर दऔ ।