भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

कायान्तरण / राहुल झा

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

बतर्ज़ शमशेर

तुमने मुझे और गहरा

और पवित्र
और अनन्त बना दिया...
एक ही चम्पई धूप-सी

पृथ्वी के तमाम रंगों पर छा गई
मैं और भी हरा हो गया...

तुम्हारे होने की उजली चाँदनी में
पिघलने के बाद
मैं...

भोर की एक पीली इबारत से
धुन की तरह उठा

और उठता ही चला गया...