भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

कितना धीमे चल रहे हैं घोड़े / ओसिप मंदेलश्ताम

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मुखपृष्ठ  » रचनाकारों की सूची  » रचनाकार: ओसिप मंदेलश्ताम  » संग्रह: तेरे क़दमों का संगीत
»  कितना धीमे चल रहे हैं घोड़े

कितना धीमे

चल रहे हैं घोड़े

लालटेन की रोशनी कितनी कम है

शायद ये अजनबी

जानते हैं ये बात

कहाँ ले जा रहे हैं मुझे वे इस रात


मेरी चिन्ता

अब उनको ही करनी है

मुझे तो नींद आ रही है

मैं सोना चाहता हूँ

शायद पहुँच गया हूँ उस मोड़ पर

जहाँ बन जाऊंगा मैं किसी तारे की रोशनी


सिर मेरा गर्म है

चक्कर आ रहे हैं

कोई अजनबी कोमल हाथ

मुझे छू रहा है

दिखाई दे रहे हैं मुझे

फर-वृक्षों के काले आकार

जिन्हें पहले नहीं देखा कभी मैंने

ऎसे कुछ धुंधले उभार


(रचनाकाल : 1911)