भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

कोऊ विधि मोहन का बन जाऊं /शिवदीन राम जोशी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

कोउ विधि मोहन का बन जाऊँ ।
मोहन मेरा मैं मोहन का, प्रेम से गुण नित गाऊँ ।
प्रेम नगर में उनके बस कर, उनसे दिल बहलाऊँ ।
प्रेम पंथ की गली -गली में, चलत चलत थक जाऊँ ।
मारग सरल बतादो आ कर, पग-पग पर घबराऊँ ।
उनके संग अंग सब राचूँ, निशदिन नेह बढ़ाऊँ ।
प्रकट दृष्टि में आवत नाहीं, कैसे करके पाऊँ ।
शिवदीन दया कर आजा मोहन, भव में मैं भरमाऊँ ।
नाव पुरानी भवसागर से , कैसे पार लगाऊँ ।