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कोठरिया जे लिपली ओसरा से अउरो देहरिया से / मगही

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मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

कोठरिया जे लिपली ओसरा से अउरो देहरिया से।
ललना, तइओ[1] न चुनरिया मइल[2] भेल, एक रे होरिलवा[3] बिनु॥1॥
नइहर में दस सै भइया अउरो भतीजा हवे हेऽ।
ललना, तइओ न नइहर सोहावन लगे, एक रे मइया बिनु॥2॥
ससुरा में दस सै ससुर अउरो देवरा हेऽ।
ललना, तइओ न ससुरा सोहावन लगे, एक रे पुरुखवा बिनु॥3॥
देहिया में दस सै सारी अउरो चोली हेऽ।
ललना, तइओ न देहिया सोहावन लगे एक रे होरिलवा बिनु॥4॥

शब्दार्थ
  1. तब भी
  2. मैल
  3. पुत्र