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क्या सच में वह वसंत था ! / आलोक श्रीवास्तव-२

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वसंत मैंने तुम्हारी आंखों में देखा था
बरसों से नहीं देखीं
तुम्हारी आंखें
देखा है -
बस एक उदास मौसम
जो सहमा-सा आता है
और
आहिस्ता से गुजर जाता है !

क्या सच में
वह वसंत था?
कहाँ से आया था वह
तुम्हारी आंखों में ?