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गंधर्व-ताल / हरिवंशराय बच्चन

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लछिमा का गीत
छितवन की,

छितवन की ओट तलैया रे,

छितवन की!


जल नील-नवल,

शीतल, निर्मल,

जल-तल पर सोन चिरैया रै,

छितवन की,

छितवन की ओट तलैया रे,

छितवन की!


सित-रक्‍त कमल

झलमल-झलमल

दल पर मोती चमकैया रे,

छितवन की,

छितवन की ओट तलैया रे,

छितवन की!


दर्पण इनमें,

बिंबित जिनमें

रवि-शि-कर गगन-तरैया रे,

छितवन की,

छितवन की ओट तलैया रे,

छितवन की!


जल में हलचर,
कलकल, छलछल

झंकृत कंगन

झंकृत पायल,

पहुँचे जल-खेल-खेलैया रे,

छितवन की,

छितवन की ओट तलैया रे,

छितवन की!


साँवर, मुझको
भी जाने दे

पोखर में कूद

नहाने दे;

लूँ तेरी सात बलैया रे,

छितवन की,

छितवन की ओट तलैया रे,

छितवन की!