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गरीबी - एक / ओम पुरोहित कागद

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एक इस्सी घुळगांठ
जकी
ना लगावणियों खोल सकै
ना भुगतणियों
अर
जकां रै लागी है
उणा रै
मुंडै ऊपर तो
फेफी ही आ गी है !