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गीत 19 / ग्यारहवां अध्याय / अंगिका गीत गीता / विजेता मुद्‍गलपुरी

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भगत लेल मोर दर्शन सम्भव
पूर्ण जगत में हमर भगत लॅे कुछ नै रहै असम्भव।

रूप चतुर्भुज देख सकै छै
परम तत्त्व के जानि सकै छै,
से सान्निध्य में आवि सकै छै
से सारूप्य के पावि सकै छै,
करै भजन-सुमिरन अरु चिन्तन, करै असम्भव सम्भव
भगत लेल मोर दर्शन सम्भव।

जे हमरा लेॅ करम करै छै
जे हमरा लेॅ धरम करै छै,
करै नाम के नित दिन गायन
हमरा लेॅ जे करै परायण,
से छिक हमर भगत हे अर्जुन, दुनिया करै अचंभव
भगत लेल मोर दर्शन सम्भव।

जौने आसक्ति से रहित छै
प्रेम भाव वैराग्य सहित छै,
वैर-भाव के जे नै जानै
सब प्राणी के निज सन मानै
से अनन्य-भक्ति वाला छिक, उनका लेॅ सब सम्भव
भगत लेल कुछ भी नै असम्भव।