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गीत 1 / चौथा अध्याय / अंगिका गीत गीता / विजेता मुद्‍गलपुरी

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श्री भगवान उवाच-

श्री भगवान कृष्ण बतलैलन।
जे अविनाशी योग प्रथम हरि सूर्यदेव संग गैलन।

से अविनाशीयोग सूर्य वैवश्वत मनु से कहलन
वैवश्वत मनु अपन पुत्र इक्ष्वाकु के, से कहलन
परम्परा बनि चलल योग के, राज ऋषि सिनी पैलन
श्री भगवान कृष्ण बतलैलन।

परम्परागत कर्मयोग पीढ़ी-दर-पीढ़ी ऐलै
नव पीढ़ी जब फँसल भोग में, कर्मयोग भुतलैलै
लुप्त भेल तब योग धरा से, लोग सहेजि न पैलन
श्री भगवान कृष्ण बतलैलन।

तोहेॅ हमरोॅ भक्त-सखा छेॅ, तोहें हमर सुजन छेॅ
सुनौ पुरातन योग, श्रवण के लायक, तो पावन छेॅ
कहि केॅ तब भगवान कृष्ण, उत्तम रहस्य समझैलन
गुप्त रहस्य प्रकट तब कैलन।