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गीत 21 / अठारहवां अध्याय / अंगिका गीत गीता / विजेता मुद्‍गलपुरी

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कोय जगह नै छै अर्जुन हय तीनों गुण से बचलोॅ
सत-तम-रज ई तीनों गुण से जानौ जग छै रचलोॅ।

धरती पर या कि अकाश में
या कि देवता गण में,
हय तीनों गुण सगरो व्यापित
इन्द्रिय-बुद्धि-मन में,
ब्राह्मण-क्षत्रिय-वैश्य-शूद्र ई तीनों गुण से रचलोॅ।

हे अर्जुन, ब्राह्मण ऊ
जे छै शुद्ध सतोगुण धारी
सतगुण और रजोगुण मिश्रित
बनल क्षत्र के धारी,
वैश्य समझि लै रजगुण और तमोगुण से जे रचलोॅ।

शुद्ध तमोगुण धारी जे छै
वहै शूद्र कहलावै,
अर्जुन, ऊ कर्मानुसार
द्विजत्व कभी नै पावै,
जनम-जनम के संस्कार से हय शरीर छै रचलोॅ
कोय जगह नै छै अर्जुन हय तीनों गुण से बचलोॅ।